मदर्स डे

अपने घर के बरामदे में शाम की चाय का लुत्फ़ उठाते हुए पप्पू कल की मुलाकात को याद करने लगे। सोचने लगे की एक बड़े लम्बे समय के अंतराल के बाद कल गुप्ता जी से मिलना हुआ। उनसे मिल कर काफी अच्छा लगा। दिल खुश हुआ। मौज मस्ती हुई , हसी मजाक हुआ। बाद में दोनों तफरी करने निकल गए शहर की। रास्ते में जाते हुए देखा की गिफ्ट की एक दूकान खचाखच भरी पड़ी है। पप्पू को कुछ समझ नहीं आया। आगे गए तोह एक दूसरी दूकान का भी माजरा था।
पप्पू ने गुप्ता जी से पूछा , ” भाई ये सब क्या है ? ये सभी गिफ्ट की दूकान पर इतनी भीड़ क्यों है ? ”
इस पर ठहाका लगते हुए गुप्ता जी बोले , ” अरे यार तुम्हे नहीं पता की दूकान पर इतनी भीड़ क्यों है ? ”
पप्पू ने बड़ा बेचारा सा मुह बनाया और कहा , ” नहीं यार , मुझे नहीं पता। ”
इस पर गुप्ता जी ने साइड में स्कूटर रोक कर , हेलमेट उतार कर पप्पू की पीठ थपथपाई और हस्ते हुए कहा , ” दोस्त पप्पू, दो दिन बाद मदर्स डे है। इसिलिये दूकान पर इतनी भीड़ है। ये सभी लोग अपनी माँ को सरप्राइज देकर खुश करेंगे। समझे दोस्त। ”

इतना कह कर गुप्ता जी ने फिर से हेलमेट पहना , स्कूटर स्टार्ट किआ और पप्पू को बिठा कर चल दिए।

गुप्ता जी की बात सुन कर पप्पू अचंभित रह गया। घर पहुंच कर सोचने लगा की कैसा ज़माना आ गया। हमारे ज़माने में तोह ऐसा कुछ नहीं था। आजकल पता नहीं क्या क्या हो रहा है। मदर्स डे। क्या होता है ये ? क्या एक ही दिन हम अपनी माँ से प्यार करते है? बाकी साल के ३६५ दिन क्या नफरत करते है ?
आज का जमाना भी अजीब है। अपनी माँ के लिए अपना प्यार दर्शाने के लिए क्या इसी एक दिन की जरुरत है। क्या इतने महंगे महंगे गिफ्ट देने से वो हमे ज्यादा प्यार करेगी ?
नहीं जनाब। ऐसा नहीं होता।
माँ दुनिया में सबसे अनोखी होती है। माँ इन सब चीज़ो से ऊपर होती है। उसे किसी आडम्बर की जरुरत नहीं होती। उसका स्वच्छ निश्छल प्रेम इन सब से कहि ऊपर है। अतुलनीय है माँ का प्रेम। वो बिना कहे सब समझ जाती है। उसे किसी मदर्स डे की जरुरत नहीं। जरुरत है तोह आज के युग की सोच बदलने की। उनकी मानसिकता बदलने की। जरुरत है पाश्चात्य संस्कृति के तौर तरीके अपनाने वालो को बदलने की।
हमारा तोह यही मानना है भाई।

पप्पू अकेले में यह सब बड़बड़ा रहे थे की अचानक उनकी धर्मपत्नी आ गयी।

रमा झट से बोल पड़ी , ” अजी ये क्या अकेले में बड़बड़ा रहे हो। पगला गए हो क्या?
इस पर पप्पू जी बोले, ” नहीं मैडम साहिबा , पगले हम नहीं , पगला तोह आज का जमाना गया है।
हैं ? बड़ी व् अचंभित आँखों से रमा पप्पू की तरफ देखने लगी तोह पप्पू जी बोले, ” अजी मैडम साहिबा, इतना अचंभित न होइए। हम कुछ गलत नहीं कह रहे। क्या आपको नहीं पता की दो दिन बाद मदर्स डे है। तुम्हे भी तोह तोहफे मिलेंगे। चिंकी और बबलू तुम्हे भी बहुत सारे तोहफे देंगे।
यह सुन कर मैडम जी गुस्से से तमतमा उठी और जोर से बोल पड़ी , ” तुम सच में पगला गए हो जी। कल ही डॉक्टर के पास अपना इलाज करने जाओ। ”
यह सुन कर हम जोर से हस पड़े और अपना चश्मा उतारते हुए बोले, ” मैडम जी, इतना गुस्सा न होइये , तनिक शांत होइए और इधर बैठिये और हमारी बात सुनिए। ”

तब कही जा कर मैडम जी थोड़ी शांत हुई और एक कुर्सी हमारे पास खिसका कर बैठ गयी।
हमने कहा , ” देखो मैडम साहिबा, जैसे आपको अचम्भा हुआ की कल आपको ढेरो तोहफे मिलेंगे अपने चिंकी और बबलू से। उसी प्रकार हमे भी अचम्भा हुआ था जब कल शाम को हम और गुप्ता जी तफरी करने गए थे। हमने देखा की शहर की सभी तोहफे वालो की दूकान तोहफे खरीदने वालो से खचाखच भरी पड़ी है। हमे भी जब कुछ समझ नहीं आया तोह गुप्ता जी ने बताया की दो दिन बाद मदर्स डे है। और सब अपनी माँ को खुश करने के लिए तोहफे खरीद रहे है। ”

यह सुन कर हमारी मैडम जी बोली , ” अजी ये क्या बात हुई। क्या आज ऐसा समय आ गया है की माँ को खुश करना पड़ रहा है। हद्द ही हो गयी है ज़माने की।
उनकी बात सुन कर हम बोले, ” हाँ जी, तभी तोह हम अकेले बैठ कर यही सोच रहे थे की आज दुनिया पर पाश्चात्य संस्कृति इतनी हावी हो गयी है की वे अपने मूल संस्कारो को ही भूल गए है।

सतयुग में क्या कभी देखा है कृष्ण भगवान को अपनी यशोदा माता के लिए कोई तोहफा लाते लाते हुए जिसको पा कर वे खुश हुई हो । हम ये नहीं कह रहे की आप तोहफे मत दीजिये। या अपनी माँ के प्रति अपना प्रेम मत व्यक्त कीजिये। सच्चा प्रेम इन आडम्बर का मोहताज नहीं। आजकल के बच्चे सोचते है की माँ पिताजी को तोहफे देंगे तोह वे खुश होंगे और हमारी हर बात मानेंगे । गलत है ये सोच । माता पिता हमेशा अपने बच्चे का भला चाहते है।

आप खुद सोच के देखिये मैडम जी, क्या आज अगर चिंकी बबलू गलत काम करेंगे और आपको तोहफे देंगे तोह आप उनसे खुश होंगी और उनको उनके गलत काम के लिए डाटेंगी नहीं ? या अगर वे आपके दिए संस्कारो का पालन करे , प्रेम , स्नेह से रहे , तोह आप खुश होंगी उनसे ?

यही तोह मुद्दे की बात है मैडम जी , आज की पीढ़ी को यह समझने की जरूरत है ही अगर आप अपनी माँ से प्यार करते है तोह उस प्रेम को तोहफे से न ख़रीदे, छोटा न करे उस प्रेम को। तोहफे देना बुरी बात नहीं। जरूर दीजिये। पर साथ में अपनी माँ के दिए संस्कारो पर चलिए, उनका आदर सम्मान कीजिये, आपके प्रति किये उनके त्याग को समझिये , कुछ बन कर दिखाईये। फिर देखिये क्या कमाल होता है। असली दिल खुश करने की बात तोह यह है। फिर देखिये की माँ खुश हो कर कैसे आपके सर पर हाथ फेर कर आपको आशीर्वाद देती है। यह वो आशीर्वाद होगा जो उनके बहुत काम आएगा, उनका जीवन संवार देगा। जरुरत है तोह बस इतनी की केवल एक दिन माँ पर प्यार न्योछावर करने से वो खुश नहीं होगी। जरुरत है उसे समझने की, उसके प्रेम को समझने की। और अगर आप इसमें सफल होते यही तोह वो होगा असली मदर्स डे क्युकी उस दिन आपने कुछ अच्छा किआ होगा। ”

हमारी बात सुन कर मैडम जी की आँखों में एक अलग ही ख़ुशी थी , जिसे देख कर हम पूछ पड़े, क्या मैडम जी ? कुछ गलत बोल दिए क्या हम?
इस पर मैडम जी अकड़ से मुह बना कर बोली, ” हम जितना तुमको पागल समझते थे उतने हो नहीं तुम।”
और हस कर चल दी वहां से।
अरे मैडम जी सुनिए तो, आपको क्या हम पागल लगते है क्या ? ” हम बोलते गए पर वाली थी। आखिर श्रीमतियाँ किसी पति की सुनती हो तोह हमारी सुने।
पर उनकी बात हम समझ गए। बिना कुछ कहे भी बहुत कुछ बोल गयी हमारी मैडम जी।
आप भी विचार कीजियेगा।

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